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हिंदी हमारी आन है हिंदी हमारी शान है, पढ़िये क्यों मनाया जाता है 14 सितंबर Hindi Diwas ?

हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस

गोरखपुर / बांसगांव संदेश

  1. 14 सितम्बर 1949 को भारत की संविधान सभा (constituent assembly) द्वारा हिन्दी को केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा (Official Language) घोषित किया गया था।
  2. हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ी , अन्य भाषाओं की संख्या में कमी
  3.  प्रधानमंत्री ने दी हिंदी दिवस की बधाई

हिंदी हमारी आन है हिंदी हमारी शान है, हिंदी हमारी चेतना वाणी का शुभ वरदान है।
हिंदी हमारी वर्तनी हिंदी हमारा व्याकरण, हिंदी हमारी संस्कृति हिंदी हमारा आचरण
हिंदी हमारी वेदना हिंदी हमारा गान है, हिंदी हमारी चेतना वाणी का शुभ वरदान है।
हिंदी हमारी आत्मा है भावना का साज़ है, हिंदी हमारे देश की हर तोतली आवाज़ है।
-कवि सुनील जोगी

हिन्दी दिवस

देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। य‍ह दिन हिंदी भाषा की महत्‍वता और उसकी नितांत आवश्‍यकता को याद दिलाता है। हिंदी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सिर्फ भारत ही नहीं, हिंदी बोलने और लिखने वाले लोग इस वक्त फिजी से लेकर नेपाल और दक्षिण अफ्रीका तक मिल जाएंगे। सन 1949 में 14 सितंबर के दिन ही हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला था जिसके बाद से अब तक हर साल यह दिन ‘हिंदी दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है।

आखिरी जनगणना के डाटा को आधार बनाएं तो देश में करीब 43.63 फीसदी जनता की पहली भाषा हिंदी पाई गई। यानी आज से 10 साल पहले देश के 125 करोड़ लोगों में से लगभग 53 करोड़ लोग हिंदी को ही मातृभाषा मानते थे।
साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो देश के सामने एक राजभाषा के चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल था। भारत हमेशा से विविधताओं का देश रहा है, यहां सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती है। राष्ट्रभाषा के रूप में किस भाषा को चुना जाए ये बड़ा प्रश्‍न था। काफी विचार के बाद हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुन लिया गया। संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिन्दी को अंग्रजों के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया।

राजभाषा के दर्ज में अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को चुने जाने पर देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रर्दशन शुरू हो गया था। तमिलनाडु में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे भी छिड़ गए थे। साल 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। गांधी जी ने ही हिंदी को जनमानस की भाषा भी कहा था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया था कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी।

हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ी , अन्य भाषाओं की संख्या में कमी

जनगणना के अनुसार,  1971 से  2011 के बीच हुए जनगणना के आंकड़ों से ये साफ हुआ है कि हिंदी बोलने वालों की संख्या में 6 फीसदी का इजाफा हुआ, जबकि बाकी सभी भाषाओं को जानने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। यानी हर दशक में हिंदी जानने वालों की संख्या औसतन 1.5 फीसदी की दर से बढ़ी।

पंजाब और जम्मू कश्मीर को छोड़ उत्तर भारत मे हिंदी प्रथम भाषा

2011 के जनगणना के अनुसार अगर राज्यकीय भाषाओं के आंकड़े देखे तो यह साफ है कि कुल हिंदीभाषियों में 90 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या भारत के 12 राज्यों में ही है। इनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सबसे ऊपर हैं। इन चार राज्यों के अलावा राजस्थान (89 फीसदी), छत्तीसगढ़ (83 फीसदी), बिहार (77.52 फीसदी) और झारखंड (61.94 फीसदी) चार ऐसे राज्य हैं, जहां हिंदी जानने वालों की अच्छी-खासी संख्या है। वही, उत्तर भारत के दो राज्यों पंजाब (9.35 फीसदी) और जम्मू-कश्मीर (2011 में 20.8 फीसदी) में भी हिंदी बोलने वालों की संख्या गिनी-चुनी ही है।

पूर्वोत्तर के राज्यों में हिंदी में नहीं होती बातचीत

हिंदी बोलने वाले राज्यों में पूर्वोत्तर भी काफी पीछे है। सिक्किम में सिर्फ 7.9 फीसदी, अरुणाचल में 7.09 फीसदी, नगालैंड में 3.18 फीसदी तो त्रिपुरा में 2.11 फीसदी लोग ही हिंदी बोलते हैं। इसके अलावा मिजोरम में 0.97 फीसदी, मणिपुर में 1.11 फीसदी लोग ही हिंदी का इस्तेमाल करते हैं। असम में भी सिर्फ 6.73 फीसदी लोग ही हिंदी बोलते हैं।

अन्य राज्यों में हिंदी भाषा की बोल चाल है कम

देश के ज्यादातर लोगों का मानना है कि मध्य भारत में भी हिंदी एक प्रमुख भाषा है। जबकि, आंकड़े चौंकाते हैं, क्योंकि देश के सिर्फ 12 राज्यों में ही हिंदी को मुख्य भाषा के तौर पर चुना गया (2011 के आंकड़ों में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश साथ शामिल)। इतना ही नहीं, पश्चिम भारत में गुजरात और मध्य भारत के महाराष्ट्र में भी काफी कम संख्या में लोग हिंदी को अपनी पहली भाषा बताते हैं। गुजरात में प्राथमिक तौर पर हिंदी बोलने वालों का आंकड़ा राज्य की जनसंख्या के मुकाबले 7 फीसदी से कुछ ज्यादा है। वहीं, महाराष्ट्र में यह संख्या 12 फीसदी के करीब है। उधर, पश्चिम बंगाल (6.96 फीसदी), गोवा (10.28 फीसदी) और असम (6.73 फीसदी) में भी पहली भाषा के तौर पर हिंदी को चिह्नित करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने दी हिंदी दिवस की बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों को हिंदी दिवस की बधाई देते हुए ट्वीट किया कि हिंदी को एक सक्षम व समर्थ भाषा बनाने में अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। यह आप सभी के प्रयासों का ही परिणाम है कि वैश्विक मंच पर हिंदी लगातार अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

 

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