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Padma Shri Awards 2021

Pride moment : 119 विभूतियां Padma Shri Award से किया गया सम्मानित, संतरे बेचने वाले और आदिवासी महिला को भी दिया गया सम्मान , जाने कौन है जिन्हें मिला सम्मान ?

Padma Shri Award 2021: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (मरणोपरांत), और धर्मगुरु कब्ले सादिक (मरणोपरांत) समेत 10 को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Padma Shri Awards 2021
Padma Shri Awards 2021

 

 

 

इस साल 119 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. इस बार 7 हस्तियों को पद्म विभूषण, 10 को पद्म भूषण और 102 को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वाली हस्तियों में 29 महिलाएं भी शामिल हैं। 16 लोगों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया।

 

 

 

Padma Shri Awards 2021
Padma Shri Awards 2021

 

हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने का समारोह राष्ट्रपति भवन में हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी इस सम्मान समारोह में मौजूद रहे।

जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे, गायक एसपी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत), सैंड कलाकार सुदर्शन साहू, पुरातत्वविद बीबी लाल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को मरणोपरांत पद्म भूषण दिया गया।

 

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (मरणोपरांत), और धर्मगुरु कब्ले सादिक (मरणोपरांत) समेत 10 को पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

102 पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों में गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा (मरणोपरांत), ब्रिटिश फिल्म निर्देशक पीटर ब्रूक, फादर वेल्स (मरणोपरांत), प्रोफेसर चमन लाल सप्रू (मरणोपरांत) का नाम शामिल है।

 

 

Padma Vibhushan (7)

1.  शिंजो आबे- पब्लिक अफेयर्स, जापान
2.  एसपी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत)-कला, तमिलनाडु.                            3. डॉक्टर बेले मोनप्पा हेगड़े-  मेडिसिन, कर्नाटक

4. नरिंदर सिंह कपनी (मरणोपरांत) साइंस एंड इंजीनियरिंग, USA
5. मौलाना वहीदुद्दीन खान – अध्यात्मवाद (Spiritualism), दिल्ली
6. बीबी लाल- पुरातत्व, दिल्ली
7. सुदर्शन साहू- कला, ओडिशा

Padma Bhushan (10)

 

1. कृष्णन नायर शांतकुमारी- कला, केरल                                         . तरुण गोगोई (मरणोपरांत)- पब्लिक अफेयर्स, असम
3. चंद्रशेखर कंबरा- साहित्य एंव शिक्षा, कर्नाटक
4. सुमित्रा महाजन- पब्लिक अफेयर्स, मध्य प्रदेश
5. नृपेंद्र मिश्र, सिविल सर्विस, उत्तर प्रदेश
6. राम विलास पासवान (मरणोपरांत)- पब्लिक अफेयर्स, बिहार
7. केशुभाई पटेल (मरणोपरांत)- पब्लिक अफेयर्स, गुजरात
8. कल्बे सादिक (मरणोपरांत)- अध्यात्मवाद, उत्तर प्रदेश
9.रजनीकांत देवीदास, उद्योग, महाराष्ट्र
10. तरलोचन सिंह, पब्लिक अफेयर्स, हरियाणा

 

संतरे बेचने वाले को भी मिला Padma Shri Award

 

Harekala Hajabba
Harekala Hajabba

 

Harekala Hajabba: संतरे बेचने वाले एक 64 साल के शख्स हरेकाला हजब्बा को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया हैं। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में सोमवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक के रहने वाले हजब्बा को यह सम्मान दिया। सामाजिक कार्य के तहत आने वाले शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए हजब्बा को इस पुरस्कार से नवाजा गया।

‘अक्षर संत’ के नाम से जाने जाने वाले हजब्बा को कभी भी स्कूली शिक्षा नहीं मिल पाई। एक बार उनका सामना कुछ विदेशी टूरिस्ट्स से हुआ, जिन्होंने उनसे अंग्रेजी में संतरों का दाम पूछा। लेकिन वह दाम नहीं बता पाए. इसके बाद उन्हें काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने कहा, ‘मुझे काफी शर्मिंदगी हुई कि जो फल मैं बरसों से बेचता आ रहा हूं, मैं उसका दाम तक नहीं बता पाया’।

 

इसके बाद उनके दिमाग में स्कूल खोलने का आइडिया आया। उनके गांव न्यूपाडापु में कोई स्कूल नहीं था और गांव के सभी बच्चे स्कूल शिक्षा से महरुम थे। हजब्बा नहीं चाहते थे कि जो उन्होंने झेला, आने वाली पीढ़ियां भी वही झेलें। इसके बाद उन्होंने संतरे बेचकर अपनी जमा पूंजी से साल 2000 में गांव की सूरत ही बदल दी और एक एकड़ में एक स्कूल बनाया, ताकि बच्चे स्कूली शिक्षा हासिल कर सकें। उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए एक प्राथमिक स्कूल की स्थापना की। भविष्य में उनका सपना अपने गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज का है। राष्ट्रपति भवन में उनके साथ उनके भतीजे भी थे।

 

 

 

 

 

“जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया” कहे जाने वाली आदिवासी महिला को भी मिला सम्मान

 

 

जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया
जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया तुलसी गौड़ा

 

कर्नाटक की पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को 30,000 से अधिक पौधे लगाने और पिछले छह दशकों से पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में शामिल रहने के लिये पद्मश्री से सम्मानित किया गया। जब वह सम्मान लेने के लिए पहुंची तो उनके बदन पर पारंपरिक धोती थी और पैरों के नीचे चप्पल तक नहीं थी, पीएम मोदी और अमित शाह से उनका सामना हुआ तो दोनों दिग्गज नेताओं ने उनकी उपलब्धि का सम्मान करते हुए उन्हें नमस्कार किया। इस तस्वीर को वहां मौजूद प्रेसकर्मियों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। अब यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

कर्नाटक में हलक्की जनजाति से नाता रखने वाली तुलसी गौड़ा का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। स्थिति इतनी चिंताजनक थी कि उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा तक ग्रहण नहीं की। प्रकृति के प्रति प्रेम के चलते वह अपना ज्यादातर समय जंगलों में बितातीं। धीरे-धीरे यह जंगल भी उन्हें पहचानने लगाष पौधों और जड़ी-बुटियों के ज्ञान के कारण आज दुनिया उन्हें ‘जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया’ के रूप में जानता है।

जीवन के सात से ज्यादा दशक देखने के बाद तुलसी गौड़ा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए पौधों का पोषण करना और युवा पीढ़ी के साथ अपने ज्ञान को साझा करना जारी रखती हैं। तुलसी गौड़ा एक अस्थायी स्वयंसेवक के रूप में वन विभाग में भी शामिल हुईं, बाद में उन्हें विभाग में स्थायी नौकरी की पेशकश की गई।

 

किन्हें मिलता है Padma सम्मान?

विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वालों को ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया जाता है। असाधारण और प्रतिष्ठित सेवा के लिए ‘पद्म भूषण’ उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया जाता है।

 

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